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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 61
शङ्कया भक्षितं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् । सा शङ्का भक्षिता येन स गुरुद्देविदुर्लभः ॥
शङ्का के द्वारा चराचर तीनों लोक नष्ट हो जाते हैं, हे देवि! उस शङ्का को जो नष्ट करता है, वह गुरु दुर्लभ है।
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