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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 60
यस्यानुभवपर्यन्तं बुद्धिस्तत्र प्रवत्र्त्तते । यस्यालोकनमात्रेण मुच्यते नात्र संशयः ॥
जिसकी बुद्धि अनुभव तक पहुँची हुई है, उसके दर्शन मात्र से मुक्ति मिलती है, इसमें सन्देह नहीं।
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