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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 55
गुरवो बहवः सन्ति आत्मनोऽन्यप्रदा भुवि । दुर्लभोऽयं गुरुद्देवि लोकेष्वात्मप्रकाशकः ॥
पृथ्वी पर ऐसे गुरु बहुत है, जो अपना ज्ञान दूसरे को देते हैं किन्तु हे देवि! संसार में आत्मज्ञान को प्रकाशित करने वाला गुरु दुर्लभ है।
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