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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 53
गुरवो बहवः सन्ति दीपवच्च गृहे गृहे । दुर्लभोऽयं गुरुर्देवि सूर्यवत् सर्वदीपकः ॥
घर-घर में दीपक के समान गुरु बहुत हैं, किन्तु हे देवि! सूर्य के समान समस्त ज्ञान का दाता गुरु दुर्लभ है।
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