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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 50
य सद्यः प्रत्ययकरं सुलभञ्चात्मसौख्यदम् । ज्ञानोपदेशं कुरुते स गुरुर्देवदुर्लभः ॥
जो तुरन्त आश्वस्त करता है और आत्मसुखदायक ज्ञानोपदेश देता है, वह 'गुरु' देवताओं को भी दुर्लभ है।
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