यः क्षणेनात्मसामर्थ्य स्वशिष्याय ददाति हि ।
क्रियायासादिरहितं स गुरुर्देवदुर्लभः ॥
जो क्षण भर में किसी क्रिया या परिश्रम के बिना अपनी शक्ति शिष्य को देता है वह गुरु देवताओं को भी दुर्लभ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।