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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 48
यः प्रसन्नः क्षणार्द्धन मोक्षलक्ष्मीं प्रयच्छति । दुर्लभं तं विजानीयाद् गुरुं संसारतारकम् ॥
जो क्षण भर में प्रसन्न होकर मोक्षरूपी रत्न प्रदान करता है, उसे संसार से उद्धार करने वाला देव दुर्लभ गुरु समझे।
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