बन्धनं योनिमुद्राया मन्त्रचैतन्यदर्शनम् ।
यन्त्रमन्त्रस्वरूपञ्च यो वेत्ति स गुरुः प्रिये ॥
योनिमुद्रा का बाँधना, मन्त्रचैतन्य विधि और यन्त्र-मन्त्र का स्वरूप जो जानता है, हे प्रिये! वह श्रेष्ठ गुरु है।
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