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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 39
घृणा सङ्का भयं लज्जा जुगुप्सा चेति पञ्चमी । कुलं शीलं तथा जातिरष्टौ पाशाः प्रकीर्त्तिताः ॥
१. घृणा (या तृष्णा), २. शङ्का (या शोक), ३. भय, ४. लज्जा, ५. जुगुप्सा, ६. कुल, ७. शील तथा ८. जाति - ये आठ पाश कहे गये हैं।
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