पद्मादिचतुरशीतिनानासनविचक्षणः ।
यमाद्यष्टाङ्गयोगज्ञः स गुरुः परमो मतः ॥
पद्मादि ८४ आसनों और यमादि अष्टाङ्गयोग का जो ज्ञाता है, वही श्रेष्ठ 'गुरु' है।
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