शिवादिक्षितिपर्यन्तं षट्त्रिंशत्तत्त्वनिर्णयम् ।
यो विजानाति तत्त्वेन स गुरुः परमो मतः ॥
शिव से क्षितिपर्यन्त ३६ तत्त्वों का निर्णय है, उसे जो वस्तुतः जानता है, वह श्रेष्ठ गुरु है।
विमर्श - शिव तत्त्व, शक्ति तत्त्व, सदाशिव तत्त्व, ईश्वर तत्त्व, सुधा विद्या तत्त्व और माया, पञ्चकञ्चुक, पुरुष, प्रकृति, बुद्धि, अहंकार, मन, पश्चकर्मेन्द्रिय, पञ्चज्ञानेन्द्रिय, पञ्चतन्मात्रा और पञ्चमहाभूत ३६ तत्त्व।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।