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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 35
शिवादिक्षितिपर्यन्तं षट्त्रिंशत्तत्त्वनिर्णयम् । यो विजानाति तत्त्वेन स गुरुः परमो मतः ॥
शिव से क्षितिपर्यन्त ३६ तत्त्वों का निर्णय है, उसे जो वस्तुतः जानता है, वह श्रेष्ठ गुरु है। विमर्श - शिव तत्त्व, शक्ति तत्त्व, सदाशिव तत्त्व, ईश्वर तत्त्व, सुधा विद्या तत्त्व और माया, पञ्चकञ्चुक, पुरुष, प्रकृति, बुद्धि, अहंकार, मन, पश्चकर्मेन्द्रिय, पञ्चज्ञानेन्द्रिय, पञ्चतन्मात्रा और पञ्चमहाभूत ३६ तत्त्व।
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