आरक्तशुक्लमिश्रा (कृष्णा) ख्यचरणत्रयवासनाम् ।
यो जानाति महादेवि स गुरुः परमो मतः ॥
१. रक्त, २. शुक्ल एवं ३. मिश्र (कृष्ण) नामक तीन चरणों की वासना (भावना) को जो जानता है, हे महादेवि! वह गुरु श्रेष्ठ है।
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