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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 32
आणवं कार्मणञ्चैव मायीयञ्च मलत्रयम् । यो विशोधयितुं शक्तः स गुरुः परमो मतः ॥
१. आणव (आत्मज) २. कार्मण (कर्मज) और ३. मायीय (मायिक) - इन तीन मलों को शुद्ध करने में जो समर्थ हैं, वह श्रेष्ठ गुरु है।
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