चक्रसङ्केतकं मन्त्रं पूजासङ्केतकं तथा ।
त्रितयं यो विजानाति स गुरुः कथितः प्रिये ॥
१. चक्रसङ्केत, २. मन्त्र (यन्त्र) संकेत और ३. पूजासंकेत - इन तीनों को जो जानता है, हे प्रिये! वह गुरु कहा गया है।
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