पदं पाशं पशुनाञ्च रहस्यार्थं विधानतः ।
यो जानाति वरारोहे स गुरुः कथितः प्रिये ॥
पद और पशुओं के पाशों का रहस्यार्थ जो विधानतः जानता है, हे बरारोहे! हे प्रिये! वह गुरु कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।