वेधं पदं विरोषञ्च ग्रहणं मोक्षणं तथा ।
यो वा सम्यग्विजानाति स गुरुः कथितः प्रिये ॥
१. बेध, २. घट (पद), ३. निरोध (विरोध), ४. ग्रहण, ५. मोक्षण - इन्हें जो भले प्रकार जानता है, हे प्रिये! वह गुरु कहा गया है।
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