पदमन्त्रकलायन्त्रसतत्त्वतभुवनाश्रयम् ।
शोधयेद् यः षडध्वानं स गुरुः कथितः प्रिये ॥
१. पद, २. वर्ण (मन्त्र), ३. कला, ४. यन्त्र, ५. मण्डल (तत्त्व), ६. भुवन (गुण) - इन छः अध्वानों को जो शुद्ध करता है, हे प्रिये! वह गुरु कहा गया है।
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