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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 16
यथा घटश्च कलसः कुम्भश्चैकार्थवाचकः । तथा देवश्च मन्त्रश्च गुरुश्चैकार्थ उच्यते ॥
देवता, मन्त्र और गुरु में अभेद-जिस प्रकार घट, कलश और कुम्भइन तीनों शब्दों का एक ही अर्थ है, उसी प्रकार देवता, मन्त्र और गुरु एक ही अर्थ के वाचक बताए गये हैं।
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