गुरु साक्षात् सदाशिव हैं, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं। गुरु शिव ही न हो तो, तो भुक्ति और मुक्ति को कौन देता? भगवान् सदाशिव और श्री गुरु-इन दोनों में कोई अन्तर नहीं है। जो उनमें अन्तर समझता है, वह पापी है। देशिक की आकृति को धारण कर पशु के समस्त पाशों को काट कर वे उसे परम पद को पहुँचाते हैं, अतः 'गुरु' कहलाते हैं। दयानिधि ईश्वर सब पर अनुग्रह करने के लिये 'आचार्य' का रूप धारण कर दीक्षा द्वारा पशुओं का मोक्ष करते हैं।
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