श्री गुरुदेव का ब्रह्मा, विष्णु, शिवत्त्वरूप - हे प्रिये! शिव त्रिनेत्रहीन होकर, विष्णु चतुर्भुजाओं से हीन होकर और ब्रह्मा चतुर्मुखों से हीन होकर साक्षात् 'श्रीगुरु' कहलाते हैं। पाप कर्मों के कारण पापियों को श्रीगुरु मनुष्य के समान और पुण्य कर्मों के कारण पुण्यात्माओं को श्रीगुरु शिव के समान संसार में दिखाई देते हैं। आँखों के सामने श्रीगुरु परम तत्त्व स्वरूप विद्यमान है, किन्तु भाग्यहीन लोग उन्हें देख नहीं पाते, जैसे अन्धे उदय हुये सूर्य को नहीं देखते।
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