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कुलार्णव • अध्याय 13 • श्लोक 1
श्री देव्युवाच- कुलेश श्रोतुमिच्छामि करुणामृतवारिधे । वक्तुमर्हसि देवेश लक्षणं गुरुशिष्ययोः ॥
श्री देवी ने कहा - हे कुलेश! हे करुण रूप अमृत के समुद्र! हे देवेश! कृपा करके गुरु एवं शिष्य दोनों के लक्षणों को मुझे सुनना चाहिए अतः उन्हें कहिए।
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