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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 95
स्थानान्तरगताचायें व्यसने विषमे स्थिते । श्रीगुरुं न त्यजेत् क्वापि तदादिष्टो व्रजेत् प्रिये ॥
हे प्रिये! गुरु के अन्यत्र जाने पर कठिन परिस्थिति में स्थित होने पर कहीं भी उनका साथ न छोड़े, उनके आदेशानुसार ही अनुवर्तन करे।
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