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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 94
गोब्राह्मणवधं कृत्वा यत् पापं समवाप्नुयात् । तत् पापं समवाप्नोति गुर्वग्रेऽनृतभाषणात् ॥
गुरु के आगे झूठ बोलने से शिष्य को वही पाप होता है, जो गो एवं ब्राह्मण के वध से लगता है।
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