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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 92
सामान्यतो निषिद्धञ्च तद्‌गुरोर्यदि सन्निधौ । आचरेत्तस्य सर्वस्य दोषः कोटिगुणो भवेत् ॥
गुरु द्वारा निषिद्ध सामान्य बात को भी यदि गुरु के पास कोई करता है, तो उसका दोष कोटि गुना अधिक होता है।
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