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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 9
शुचिर्वाप्यशुचिर्वापि भक्त्या स्मरति पादुकाम् । अनायासेन धर्मार्थकाममोक्षान् लभते सः ॥
पवित्र हो या अपवित्र, जो भक्ति से पादुकास्मरण करता है, वह सहज ही धर्मार्थ, काम एवं मोक्ष को प्राप्त करता है।
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