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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 89
अभिमानो न कर्त्तव्यो जातिविद्याधनादिभिः । सर्वदा सेवयेत् नित्यं शिष्यः श्रीगुरुसन्निधौ ॥
जाति, विद्या, धन आदि से अभिमान न करे, सदा शिष्य श्री गुरु के निर्कट रहकर उनकी नित्य सेवा करे।
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