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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 88
गच्छंस्तिष्ठन् स्वपन् जाग्रज्जपन् जुह्वात् प्रपूजयेत् । गुर्वाज्ञामेव कुर्वीत तदगतेनान्तरात्मना ॥
चलते, बैठते, सोते-जागते, जपते, हवन-पूजन करते गुरु-आज्ञा का ही अन्तरात्मा से पालन करे।
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