मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 87
गुरुकार्ये स्वयं शक्तो नापरं प्रेषयेत् प्रिये । बहुभृत्यपरैर्भृत्यैः सहितोऽप्यतिभक्तिमान् ॥
हे प्रिये! गुरु के कार्य में स्वयं समर्थ हो, तो बहुत से नौकरों के होते हुए भी भक्तिमान् शिष्य दूसरे को न भेजे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें