हे प्रिये! गुरु, योगी एवं महासिद्ध के पीठ, क्षेत्र, आश्रमों में पैर घोना, स्नान करना, तेल लगाना, दातून करना, मल, मूत्र त्याग करना, बूकना, बाल कटाना, सोना, स्वीसङ्ग करना, बीरासन से बैठना, कठोर बात करना, आज्ञा चलाना, हँसना, रोना, बाल खोलना, नंगे होना, पैर फैलाना, झगड़ा करना, अङ्ग भङ्ग करना, चिढ़ाना, मटकाना, ताली बजाना, ताल ठोकना, सिर पीटना, जुआ खेलना, कुश्ती लड़ना, नाचना बजाना आदि नहीं करना चाहिए। हे अम्बिके! मोहवश यदि कोई करता है, तो उसे देवता का शाप मिलता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।