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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 81
विविक्षुर्देशिकावासं शान्तचित्तोऽतिभक्तिमान् । वाहनं पादुकां छत्रं चामरं व्यजनादिकम् । ताम्बूलं कज्जलं वेशमुत्सृज्य प्रविशेच्छनैः ॥
जिज्ञासु देशिक (गुरु) के निवास स्थान में शान्त चित्त, अतिभक्तिपूर्ण होकर वाहन, पादुका, छत्र, चामर, व्यञ्जन और ताम्बूल, काजलादि आडम्बर छोड़कर धीरे से प्रवेश करे।
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