गुरुमित्रसुहृद्दासीदासाद्यान् नावमानयेत् ।
न निन्देदस्य समयान् वेदशास्त्रागमादिकान् ॥
गुरु के मित्र, सुहृद, दासी, दास की अवज्ञा न करे और न उनके समय, बेद, शास्त्रागम आदि की निन्दा करे।
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