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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 76
गुरुकोपाद्विनाशः स्याद् गुरुद्रोहात्तु पातकम् । विमृत्युगुरुनिन्दायां गुर्वनिष्टान्महापदः ॥
गुरु क्रोध से विनाश, गुरु द्रोह से पाप, गुरु निन्दा से अपमृत्यु और गुरु का अनिष्ट करने से महान् विपत्ति होती है।
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