गुरोः स्थानं सम्प्रदायं तद्धर्म यो विनाशयेत् ।
गुरुभिः स बहिष्कायों दण्ड्यो वध्यः स घातकैः ॥
गुरु के स्थान, सम्प्रदाय और धर्म को जो नष्ट करता है, वह गुरुओं द्वारा त्याज्य, दण्डनीय होकर घातकों द्वारा वध्य होता है।
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