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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 73
आज्ञाभङ्गोऽर्थहरणं गुरोरप्रियवर्त्तनम् । गुरुद्रोहमिदं प्राहुर्यः करोति स पातकी ॥
आज्ञा न मानना, धन चुराना और गुरु का अप्रिय करना - इन्हें 'गुरुद्रोह' कहा गया है। जो ऐसा करता है, वह पापी है।
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