गुरुद्रव्याभिलाषी च गुरुस्त्रीगमनोत्सुकः !
पतितस्य क्षुल्लकस्य प्रायश्चित्तं न विद्यते ॥
गुरुद्रव्य की इच्छा करने वाले, गुरु स्त्री गमन में उत्सुक होने वाले पतित तथा नीच के लिये कोई प्रायश्चित्त नहीं है।
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