यस्तिलार्द्धं तदर्द्ध वा गुरुस्वमुपजीवति ।
लोभान्मोहात् स पच्येत नरके च त्रिसप्तके ॥
जो लोभ या मोह से गुरु के धन का तिलार्ध या उसके आधे बराबर भी अंश का उपयोग करता है। वह २१ वर्ष पर्यन्त नरक में रहता है।
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