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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 69
यस्मिन् द्रव्ये गुरोरस्ति स्पृहा नानुभवेत्तु तत् । अवश्यं यदि वाञ्छा स्यादनुभूयात्तदाज्ञया ॥
जिस द्रव्य में गुरु की इच्छा हो, उसे स्वयं न ग्रहण करे। यदि बहुत इच्छा हो, तो उनकी अनुमति से उसे ग्रहण करे।
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