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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 67
भक्त्या वित्तानुसारेण गुरुमुद्दिश्य यत् कृतम् । अल्पे महति वा तुल्यं पुण्यमान्यदरिद्रयोः ॥
भक्ति से यथाशक्ति गुरु के लिये जो किया जाता है, वह थोड़ा या बहुत निर्धन या धनी का पुण्य एक समान होता है।
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