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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 63
पदे पदेऽश्वमेधस्य फलं प्राप्नोत्यसंशयः । शुश्रूषणपरो यस्तु गुरुदेवमहात्मनाम् ॥
गुरु, देवता और महात्माओं की सेवा में लगा हुआ शिष्य निश्चय ही पग-पग पर अश्वमेध का फल पाता है।
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