स्वशास्त्रोक्तं रहस्यार्थं न वदेद् यस्य कस्यचित् ।
यदि ब्रूयात् स समयाच्च्युत एव न संशयः ॥
अपने शास्त्र में कहे गये रहस्यार्थ को जिस किसी को न बताए, जो बताता है, वह 'समय' (आचार) से च्युत होता है, इसमें सन्देह नहीं।
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