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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 57
गुरौ सन्निहिते यस्तु पूजयेदन्यमम्बिके । स याति नरकं घोरं सा पूजा निष्फला भवेत् ॥
हे अम्बिके! गुरु के निकट होने पर जो अन्य की पूजा करता है, उसकी वह पूजा निष्फल होती है और वह घोर नरक में पड़ता है।
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