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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 55
न वियोगं गुरोः कुर्यात् युष्मदो नैव भाषयेत् । ऋणदानं तथाऽऽदानं वस्तूनां क्रयविक्रयम् । न कुर्याद् गुरुभिः सार्द्धं शिष्यो भूत्वा कथञ्चन ॥
गुरु की अवज्ञा न करे, आप कहकर न बोले, शिष्य होकर ऋण देना लेना या वस्तुओं को खरीदना बेचना गुरु के साथ कभी न करे।
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