गुर्वत्र न तपः कुर्यान्नोपवासव्रतादिकम् ।
तीर्थयात्रां न कुर्याच्च न स्नायादात्मशुद्धये ॥
गुरु के सामने न तप करे, न उपवास करे, न व्रत करे, न तीर्थ अथवा यात्रा आदि भी न करे, और न अपनी शुद्धि के लिए स्नान ही करे।
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