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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 51
गुर्वर्थं धारयेद्देहं तदर्थं धनमर्जयेत् । निजप्राणान् परित्यज्य गुरुकार्य समाचरेत् ॥
गुरु के लिए शरीर रखे, उन्हीं के लिए धन कमाए एवं अपने प्राणों को छोड़कर भी गुरु का कार्य सम्पन्न करे।
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