गुरुः पिता गुरुर्माता गुरुर्देवो महेश्वरः ।
शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन ॥
गुरु पिता है, गुरु माता हैं और स्वयं देव महेश्वर भी गुरु ही हैं। शिव भगवान् के रुष्ट होने पर गुरु रक्षा करते हैं किन्तु स्वयं गुरु के रुष्ट होने पर कोई नहीं बचा सकता।
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