गुरुं न मत्त्र्यं बुध्येत यदि बुध्येत तस्य हि ।
न कदाचिद्भवेत् सिद्धिर्मन्त्रैर्वा देवतार्चनैः ॥
गुरु को मरणशील न माने क्योंकि वैसा मानने से मन्त्रों या देवपूजाओं से कभी सिद्धि नहीं मिलती।
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