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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 42
साक्षाद् गुरुमये देवि सर्वस्मिन् भुवनान्तरे । किन्नु भक्तिमतां क्षेत्रे मन्त्रः केषां न सिध्यति ॥
हे देवि! गुरु द्वारा व्याप्त समस्त भुवन में सभी भक्तों को कौन सा मन्त्र सिद्ध नहीं होता है।
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