न योगो न तपो नार्चाक्रमः कोऽपि प्रलीयते ।
अमाये कुलमार्गेऽस्मिन् भक्तिरेव विशिष्यते ॥
योग, तप अथवा पूजा क्रम - किसी से भी माया दूर नहीं होती। मायारहित इस कुलमार्ग में भक्ति की ही विशेषता है।
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