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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 37
कायाक्लेशेन महता तपसा वापि यत् फलम् । तत् फलं लभते देवि सुखेन गुरुसेवया ॥
शरीर को कष्ट देकर, महान् तप से जो फल मिलता है, हे देवि! बह गुरु सेवा द्वारा सरलता से मिल जाता है।
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