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कुलार्णव • अध्याय 12 • श्लोक 36
कि तीर्थाद्यैर्महायासैः किं व्रतैः कायशोषणैः । निर्व्याजसेवा देवेशि भक्तिरेषा हि सद्‌गुरोः ॥
तीर्थादि में महान् श्रम से क्या लाभ और व्रतों से शरीर सुखाने से क्या लाभ? हे देवेशि! सद्‌गुरु की यह भक्ति तो निर्व्याज सेवा है।
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